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सृजनात्मक अभिव्यक्ति

हृदय की गहराईयों से निकली अनुभूति जब कला का रुप लेती है तब कलाकार का अन्तिर्मन मानो मूर्त रूप ले उठता है। प्रत्येक बच्चे के मन में कुछ स्वतंत्र भाव उत्पन्न होते हैं, उन भावों को वह कला के माध्यम से प्रकट करना चाहता है।
कला ही है जिसमें मानव मन में संवेदनाएं उभारने, प्रवृत्तियों को ढालने, चिंतन को मोड़ने तथा अभिरुचि को दिशा देने की अदभुत क्षमता होती है।
 
 
 
कला की अभिव्यक्ति को अवसर मिलता है “प्रतिभास्थली” में। इन्हीं सृजनात्मक अभिव्यक्तियों के फलस्वरुप छात्राओं में मौलिकता, आत्मविश्वास, रचनात्मकता आदि गुणों का विकास होता है।
हृदय की गहराईयों से निकली अनुभूति जब कला का रुप लेती है तब कलाकार का अन्‍तर्मन मानो मूर्त रूप ले उठता है। प्रत्येक बच्चे के मन में कुछ स्वतंत्र भाव उत्पन्न होते हैं, जिन्हें वह कला के माध्यम से प्रकट करना चाहता है।
 
विद्यालय में रेखांकन, चित्रकला, मीनाकारी, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, क्विलींग, लमासा, मेक्रम, मार्बल मिनिएचर, टाई और डाई, मेहंदी, क्रोशिया, रंगोली, ग्लास पेंटिंग आदि जैसे हस्त कौशलों से छात्राओं की रुचि के विकास के साथ-साथ अवकाश के समय का सदुपयोग होता हैं।